फिर कैसे बढ़ेगा पर्यटन कारोबार

कुल्लू। देश-विदेश में नाम कमा चुकी कुल्लू घाटी में भले ही सालाना लाखों की संख्या में टूरिस्ट सैर सपाटे के लिए आते हों लेकिन इसके बावजूद पर्यटन स्थल अनदेखी का शिकार हैं। इन्हीं में से एक है जलोड़ी दर्रा। प्रकृति ने जलोड़ी को संवारने में कोई कसर नहीं रखी है। लेकिन सुविधाओं की कमी के चलते यहां आने वाले पर्यटकों को खासी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
जलोड़ी में न तो जल है और न ही बिजली की व्यवस्था। 90 साल पूर्व वर्ष 1923 में सड़क सुविधा से जुड़े जलोड़ी दर्रा पर अब तक सुविधाएं मुहैया क्यों नहीं हो पाई यह सवाल लोगों के मन में बार-बार कौंधता है। समुद्रतल से 10281 फुट ऊंचाई पर स्थित जलोड़ी दर्रे पर हिम ऊर्जा विभाग ने लाइट की सुविधा के लिए करीब आधा दर्जन सोलर लाइटें लगा रखी हैं। लेकिन यह जलती नहीं। आईपीएच बंजार ने सालों पूर्व पाइप लाइन बिछाई थी लेकिन नलकों से पानी की बूंद तक नहीं टपकती। यहां व्यवसाय कर रहे एक दर्जन के करीब व्यापारियों को टैक्सियों और बसों के माध्यम से छह किलोमीटर दूर खनाग या फिर दो किलोमीटर दूर बड़ानानला से पानी ढोकर लाना पड़ता है।
जाड़े के दिनों में बर्फ पिघलाकर काम चलाना पड़ता है। व्यवसायी मोहर सिंह, जय प्रकाश और दलीप सिंह ने कहा कि चुनावी बेला पर विभिन्न दलों के नेता बड़े-बड़े वायदे करते हैं लेकिन बाद में कुछ नहीं होता। सुविधाओं की कमी के चलते पर्यटन स्थल बाहु, सोझा, रघुपुरगढ़, सरयोलसर, टकरासी तथा पनेऊ विकसित होने के बजाए पिछड़ते जा रहे हैं। समर सीजन शुरू हो चुका है तथा यहां रोजाना पर्यटकों की संख्या में इजाफा हो रहा है। लेकिन सुविधाएं न होने के कारण सैलानी यहां ज्यादा देर नहीं रुकते।

ठीक करवा दी हैं सोलर लाइटें
जलोड़ी दर्रा में खराब पड़ी सोलर लाइटों को ठीक कर करवा दिया है। कुछ लाइटें बैटरी में खराबी के चलते बंद पड़ी हैं। इस बारे उच्च अधिकारियों को पत्राचार से अवगत करवा रहे हैं। जल्द ही समस्या का समाधान हो जाएगा।
नारायण दत्त प्रोजेक्ट आफिसर हिम ऊर्जा कुल्लू

पानी का स्रोत सूखने से दिक्कत
बिछाई गई पाइप लाइन के मुख्य स्रोत में पानी सूख गया है। विभाग बड़ानाला से मोटर के माध्यम से पानी की सप्लाई देने को तैयार है लेकिन बिजली न होने से ऐसा नहीं हो पा रहा।
हरि प्रकाश भारद्वाज एसडीओ आईपीएच बंजार

Related posts